भारत में रिटेल केमिस्ट के लिए सबसे संवेदनशील और कानूनी रूप से सख्त हिस्सा होता है: Schedule H1 और Schedule X (नारकोटिक) दवाइयों का रिकॉर्ड रखना।
ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) और ड्रग इंस्पेक्टर्स की रूटीन इंस्पेक्शन में 70% से अधिक शो-कॉज नोटिस (Show-Cause Notices) या लाइसेंस निलंबन सिर्फ इसलिए होते हैं क्योंकि केमिस्ट के पास शेड्यूल H1 रजिस्टर अधूरा या पुराना होता है।
Schedule H1 क्या है और इसमें कौन-सी दवाइयां आती हैं?
भारत सरकार ने 2013 में एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित उपयोग और नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए Schedule H1 लागू किया था। इसमें 46 प्रमुख दवाइयां शामिल हैं, जैसे:
- तीसरी और चौथी पीढ़ी के शक्तिशाली एंटीबायोटिक्स (उदा. Meropenem, Cefixime, Cefpodoxime, Levofloxacin)।
- एंटी-टीबी दवाइयां (Rifampicin, Isoniazid)।
- नींद और नर्वस सिस्टम की दवाइयां (Alprazolam, Zolpidem, Tramadol, Diazepam)।
कानूनन रजिस्टर में क्या-क्या दर्ज होना ज़रूरी है?
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के नियम 65 के अनुसार, जब भी आप किसी मरीज को शेड्यूल H1 दवा बेचते हैं, तो रजिस्टर में ये 7 कॉलम भरे होने चाहिए:
दवा किस दिन और किस समय दी गई।
मरीज का नाम और उसका आवासीय पता व मोबाइल नंबर।
डॉक्टर का पूरा नाम और उनका स्टेट मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर।
दवा का ब्रांड नाम, मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, सही बैच नंबर और कितनी गोलियां/शीशियां दी गईं।
PharmaFlow ERP में डिजिटल शेड्यूल H1 रजिस्टर
हाथ से मोटी डायरी में पेन से लिखना भीड़ के समय असंभव हो जाता है। PharmaFlow ERP में यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमैटिक (Digital & Automated) है:
- जब भी आप बिल में किसी H1 दवा (जैसे Alprazolam या Cefixime) को जोड़ते हैं, सिस्टम तुरंत पहचान लेता है कि यह Schedule H1 है।
- स्क्रीन पर एक छोटा सा बॉक्स खुलता है जिसमें डॉक्टर का नाम और मरीज का नाम पूछा जाता है।
- बिल बनते ही बैकएंड में Schedule H1 Register अपने आप अपडेट हो जाता है।
- जब भी ड्रग इंस्पेक्टर आएं, 1-क्लिक में Export Schedule H1 Register (PDF/Print) निकाल कर तुरंत उनके सामने पेश करें।
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