भारत में किसी भी गली या मोहल्ले के मेडिकल स्टोर की सबसे बड़ी मजबूरी होती है: नियमित ग्राहकों को उधारी (Credit) पर दवाइयां देना।
अक्सर बीपी, शुगर और दिल के पुराने मरीजों के घर महीने का बिल ₹3,000 से ₹8,000 तक बनता है, और वे महीने की पहली या दस तारीख को आकर पेमेंट करते हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब:
- कागज की डायरी में लिखा हुआ कोई बिल ग्राहक मानने से इनकार कर देता है।
- दुकानदार बार-बार तकादा करते हुए हिचकिचाता है कि कहीं ग्राहक नाराज़ होकर दूसरी दुकान पर न चला जाए।
- लाखों रुपये बाजार में फंस जाते हैं और डिस्ट्रीब्यूटर को चेक देने के लिए पैसे कम पड़ जाते हैं।
डिजिटल उधारी खाता: हर पर्चे का पक्का सबूत
PharmaFlow ERP में एक फुल-फीचर्ड Smart Udhaar Ledger दिया गया है:
जब आप बिल बनाते हैं और Payment Mode में "Udhaar" चुनते हैं, तो सिस्टम तुरंत ग्राहक के नाम के आगे वह अमाउंट जोड़ देता है। इसमें तारीख, समय, खरीदी गई दवाइयों के नाम और बैच नंबर तक दर्ज होते हैं।
महीने के अंत में आपको ग्राहक को फोन करके यह नहीं कहना कि "पैसे दे दो"। सिस्टम से सीधे "Send WhatsApp Statement" पर क्लिक करें। ग्राहक के व्हाट्सएप पर एक बहुत ही शालीन और पेशेवर मैसेज जाता है: जिसमें पिछले महीने के सारे बिलों की लिस्ट और बचा हुआ कुल बैलेंस होता है।
व्हाट्सएप स्टेटमेंट के साथ ग्राहक को आपका UPI QR कोड और डायरेक्ट पे लिंक मिल जाता है। ग्राहक घर बैठे Google Pay या PhonePe से बकाया चुका देता है और सॉफ्टवेयर में उसका खाता अपने आप क्लियर हो जाता है!
उधारी वसूली 3 गुना तेज़ करने के 3 व्यावहारिक नियम
- क्रेडिट लिमिट सेट करें: हर ग्राहक की सीमा तय करें (जैसे अधिकतम ₹5,000)। सीमा पार होते ही सिस्टम बिलिंग काउंटर पर अलर्ट दे देगा।
- पारदर्शिता से विवाद खत्म करें: जब ग्राहक को व्हाट्सएप पर हर खरीद की पूरी पर्ची दिखती है, तो "मैंने यह दवा कब ली थी?" वाला विवाद 100% खत्म हो जाता है।
- पार्ट पेमेंट (आंशिक भुगतान): अगर ग्राहक ₹5,000 में से ₹2,000 जमा करता है, तो तुरंत उसका रसीद वाउचर काटकर दें और बचा हुआ ₹3,000 बैलेंस अपडेट करें।
अपनी दुकान का फंसा हुआ पैसा आसानी से निकालें!
PharmaFlow ERP के डिजिटल उधारी खाते के साथ अपना कैशफ्लो मजबूत करें। 14 दिन का ट्रायल बिल्कुल मुफ़्त है।
Start 14-Day Free Trial